श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 71: अतिकाय का भयंकर युद्ध और लक्ष्मण के द्वारा उसका वध  »  श्लोक 110
 
 
श्लोक  6.71.110 
तान्यायुधान्यद्भुतविग्रहाणि
मोघानि कृत्वा स शरोऽग्निदीप्त:।
प्रगृह्य तस्यैव किरीटजुष्टं
तदातिकायस्य शिरो जहार॥ ११०॥
 
 
अनुवाद
परंतु अग्नि के समान प्रज्वलित उस बाण ने उन अद्भुत अस्त्रों को निष्फल कर दिया और अतिकायका का मुकुटधारी सिर काट डाला ॥110॥
 
But that arrow, which lit up like fire, made those wonderful weapons useless and severed the crowned head of Atikayaka. 110॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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