vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 71: अतिकाय का भयंकर युद्ध और लक्ष्मण के द्वारा उसका वध
»
श्लोक 108
श्लोक
6.71.108
तं प्रेक्षमाण: सहसातिकायो
जघान बाणैर्निशितैरनेकै:।
स सायकस्तस्य सुपर्णवेग-
स्तथातिवेगेन जगाम पार्श्वम्॥ १०८॥
अनुवाद
उसे देखकर अतिकाय ने सहसा उस पर अनेक तीखे बाण छोड़े, किन्तु फिर भी गरुड़ के समान वेगवान वह सायक बड़े वेग से उसके पास पहुँच गया।
Seeing him, Atikaya suddenly shot many sharp arrows at him, but even then that Saiyaka, as swift as Garuda, reached him with great speed.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd