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ramayan 6.70.61: देवताओं का शत्रु महापार्श्व दो घंटे तक शव की तरह पड़ा रहा। फिर होश में आते ही वह अचानक उछल पड़ा। उसका रक्त से लथपथ शरीर संध्या के बादलों के समान लाल हो गया। उसने वरुणपुत्र ऋषभ पर गहरा घाव कर दिया। 61.   |   ramayan सर्ग 6.70: हनुमान जी के द्वारा देवान्तक और त्रिशिरा का, नील के द्वारा महोदर का तथा ऋषभ के द्वारा महापार्श्व का वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.70.61 
मुहूर्तमासीत् स गतासुकल्प:
प्रत्यागतात्मा सहसा सुरारि:।
उत्पत्य संध्याभ्रसमानवर्ण-
स्तं वारिराजात्मजमाजघान॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
देवताओं का शत्रु महापार्श्व दो घंटे तक शव की तरह पड़ा रहा। फिर होश में आते ही वह अचानक उछल पड़ा। उसका रक्त से लथपथ शरीर संध्या के बादलों के समान लाल हो गया। उसने वरुणपुत्र ऋषभ पर गहरा घाव कर दिया। 61.
 
The enemy of the gods, Mahaparsva lay like a corpse for two hours. Then, regaining consciousness, he suddenly jumped up. His blood-soaked body looked as red as the evening clouds. He inflicted a deep wound on Rishabha, the son of Varuna. 61.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)