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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 70: हनुमान जी के द्वारा देवान्तक और त्रिशिरा का, नील के द्वारा महोदर का तथा ऋषभ के द्वारा महापार्श्व का वध  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  6.70.53 
तेजसा सम्प्रदीप्ताग्रां रक्तमाल्यविभूषिताम्।
ऐरावतमहापद्मसार्वभौमभयावहाम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
उसका अग्रभाग तेज से चमक रहा था, वह लाल पुष्पों से सुशोभित था और ऐरावत, पुण्डरीक तथा सार्वभौम नामक दैत्यों को भी भयभीत कर रहा था।
 
Its front portion was blazing with brilliance. It was decorated with red flowers and was frightening even the giants named Airavat, Pundarik and Sarvabhauma. 53.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)