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ramayan 6.70.48: उन सिरों की समस्त इन्द्रियाँ विशाल थीं। उनके नेत्र प्रज्वलित अग्नि के समान चमक रहे थे। उस इन्द्रद्वेषी त्रिशिरा के वे तीनों सिर पृथ्वी पर उसी प्रकार गिर पड़े, जैसे आकाश से तारे गिरते हैं। 48।   |   ramayan सर्ग 6.70: हनुमान जी के द्वारा देवान्तक और त्रिशिरा का, नील के द्वारा महोदर का तथा ऋषभ के द्वारा महापार्श्व का वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.70.48 
तान्यायताक्षाण्यगसंनिभानि
प्रदीप्तवैश्वानरलोचनानि।
पेतु: शिरांसीन्द्ररिपो: पृथिव्यां
ज्योतींषि मुक्तानि यथार्कमार्गात्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
उन सिरों की समस्त इन्द्रियाँ विशाल थीं। उनके नेत्र प्रज्वलित अग्नि के समान चमक रहे थे। उस इन्द्रद्वेषी त्रिशिरा के वे तीनों सिर पृथ्वी पर उसी प्रकार गिर पड़े, जैसे आकाश से तारे गिरते हैं। 48।
 
All the senses of those heads were huge. Their eyes were glowing like blazing fire. Those three heads of that Indra-hater Trishira fell on the earth in the same manner as stars fall from the sky. 48.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)