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श्लोक 6.70.35  |
तद् व्यर्थं शिखरं दृष्ट्वा द्रुमवर्षं तदा कपि:।
विससर्ज रणे तस्मिन् रावणस्य सुतं प्रति॥ ३५॥ |
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| अनुवाद |
| उस पर्वत शिखर पर किया गया आक्रमण व्यर्थ हुआ देखकर कपिवार हनुमान्जी ने उस रणभूमि में रावणपुत्र त्रिशिरा पर वृक्षों की वर्षा आरम्भ कर दी॥35॥ |
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| Seeing that the attack on that mountain peak was in vain, the Kapivaar Hanuman started showering trees on Ravana's son Trishira in that battlefield. 35॥ |
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