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श्लोक  6.70.31 
ततस्तु नील: प्रतिलब्धसंज्ञ:
शैलं समुत्पाटॺ सवृक्षखण्डम्।
तत: समुत्पत्य महोग्रवेगो
महोदरं तेन जघान मूर्ध्नि॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, होश में आने पर नील ने वृक्षों के समूह सहित एक पर्वत शिखर उखाड़ लिया। उसका वेग अत्यन्त भयानक था। उसने उछलकर उस वृक्ष को महोदर के सिर पर पटक दिया।
 
Thereafter, on regaining consciousness, Neel uprooted a mountain peak with clusters of trees. His speed was very terrifying. He jumped and threw that tree on Mahodar's head.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)