स मुष्टिनिष्पिष्टविभिन्नमूर्धा
निर्वान्तदन्ताक्षिविलम्बिजिह्व:।
देवान्तको राक्षसराजसूनु-
र्गतासुरुर्व्यां सहसा पपात॥ २६॥
अनुवाद
उसके प्रहार से देवान्तक का सिर फटकर चूर हो गया, उसके दाँत, आँखें और लम्बी जीभ निकल आई और वह राक्षसराज सहसा निर्जीव होकर भूमि पर गिर पड़ा॥26॥
With his blow, Devantaka's head was split and crushed. His teeth, eyes and long tongue came out and the demon prince suddenly fell lifeless on the ground.॥26॥