श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 70: हनुमान जी के द्वारा देवान्तक और त्रिशिरा का, नील के द्वारा महोदर का तथा ऋषभ के द्वारा महापार्श्व का वध  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.70.22 
तद‍्बाणशतनिर्भिन्नं विदारितशिलातलम्।
सविस्फुलिङ्गं सज्वालं निपपात गिरे: शिर:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उसके सैकड़ों बाणों से छेदित होकर पर्वत की प्रत्येक चट्टान चकनाचूर हो गई और पर्वत की चोटी चिंगारियों और ज्वालाओं के साथ पृथ्वी पर गिर पड़ी।
 
Pierced by hundreds of his arrows, each and every rock on the mountain shattered and the peak of the mountain fell to the earth along with sparks and flames.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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