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श्लोक 6.7.18  |
तिष्ठ वा किं महाराज श्रमेण तव वानरान्।
अयमेको महाबाहुरिन्द्रजित् क्षपयिष्यति॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| 'या महाराज! आप यहाँ चुपचाप बैठे रहें। आपको प्रयत्न करने की क्या आवश्यकता है? यह बलवान इन्द्रजीत ही समस्त वानरों का वध कर देगा॥18॥ |
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| ‘Or Maharaj! You should sit here quietly. What is the need for you to put in effort. This powerful Indrajit alone will kill all the monkeys.॥ 18॥ |
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