श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 69: रावण के पुत्रों और भाइयों का युद्ध के लिये जाना और नरान्तक का अङ्गद के द्वारा वध  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  6.69.95 
तदान्तरिक्षे त्रिदशोत्तमानां
वनौकसां चैव महाप्रणाद:।
बभूव तस्मिन् निहतेऽग्रॺवीर्ये
नरान्तके वालिसुतेन संख्ये॥ ९५॥
 
 
अनुवाद
जब वालिकुमार ने युद्धस्थल में महाबली नरकासुर को मार डाला, तब आकाश में देवता और पृथ्वी पर वानर हर्ष से जयजयकार करने लगे ॥95॥
 
When Valikumar killed the mighty Naraka on the battlefield, the gods in the sky and the monkeys on the earth shouted for joy. ॥95॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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