श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 69: रावण के पुत्रों और भाइयों का युद्ध के लिये जाना और नरान्तक का अङ्गद के द्वारा वध  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  6.69.93 
अथाङ्गदो मृत्युसमानवेगं
संवर्त्य मुष्टिं गिरिशृङ्गकल्पम्।
निपातयामास तदा महात्मा
नरान्तकस्योरसि वालिपुत्र:॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
तब अंगद ने पर्वत शिखर के समान अपनी मुठ्ठी उठाई, जिसका बल मृत्यु के समान था। तब उन महाबली वालिकुमार ने उससे नरान्तक की छाती पर प्रहार किया।
 
Then Angad raised his fist like a mountain peak, whose force was like death. Then that great soul Valikumar struck Narantak in the chest with it.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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