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श्लोक 6.69.93  |
अथाङ्गदो मृत्युसमानवेगं
संवर्त्य मुष्टिं गिरिशृङ्गकल्पम्।
निपातयामास तदा महात्मा
नरान्तकस्योरसि वालिपुत्र:॥ ९३॥ |
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| अनुवाद |
| तब अंगद ने पर्वत शिखर के समान अपनी मुठ्ठी उठाई, जिसका बल मृत्यु के समान था। तब उन महाबली वालिकुमार ने उससे नरान्तक की छाती पर प्रहार किया। |
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| Then Angad raised his fist like a mountain peak, whose force was like death. Then that great soul Valikumar struck Narantak in the chest with it. |
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