श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 69: रावण के पुत्रों और भाइयों का युद्ध के लिये जाना और नरान्तक का अङ्गद के द्वारा वध  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  6.69.89 
तं प्रासमालोक्य तदा विभग्नं
सुपर्णकृत्तोरगभोगकल्पम्।
तलं समुद्यम्य स वालिपुत्र-
स्तुरंगमस्याभिजघान मूर्ध्नि॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
गरुड़ द्वारा काटे गए सर्प के शरीर के समान उस भाले को टुकड़े-टुकड़े होकर पड़ा हुआ देखकर बालिपुत्र अंगद ने अपनी हथेली उठाकर नरान्तक के घोड़े के सिर पर जोर से पटक दिया।89
 
Seeing that spear lying in pieces like the body of a serpent severed by Garuda, Vali's son Angada raised his palm and slapped Narantaka's horse hard on the head. 89
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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