श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 69: रावण के पुत्रों और भाइयों का युद्ध के लिये जाना और नरान्तक का अङ्गद के द्वारा वध  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  6.69.44 
तत: समुत्कृष्टरवं निशम्य
रक्षोगणा वानरयूथपानाम्।
अमृष्यमाणा: परहर्षमुग्रं
महाबला भीमतरं प्रणेदु:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
वानरयुथपतियों की घोर गर्जना सुनकर भयंकर एवं बलवान राक्षस अपने शत्रुओं का हर्ष सहन न कर सके; अतः वे स्वयं भी अत्यन्त भयंकर सिंहनाद करने लगे ॥44॥
 
Hearing the loud roar of the Vanarayuthapathis, the fierce and powerful Rakshasas could not bear the joy of their enemies; Therefore, he himself started making a very fierce lion roar. 44॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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