श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 69: रावण के पुत्रों और भाइयों का युद्ध के लिये जाना और नरान्तक का अङ्गद के द्वारा वध  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.69.3 
नूनं त्रिभुवनस्यापि पर्याप्तस्त्वमसि प्रभो।
स कस्मात् प्राकृत इव शोचस्यात्मानमीदृशम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! आप ही तीनों लोकों से युद्ध करने में समर्थ हैं; फिर आप साधारण मनुष्य की भाँति शोक क्यों कर रहे हैं?॥3॥
 
‘Prabhu! You alone are certainly capable of fighting the three worlds; then why are you grieving like an ordinary person?॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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