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श्लोक 6.68.23  |
तस्यायं कर्मण: प्राप्तो विपाको मम शोकद:।
यन्मया धार्मिक: श्रीमान् स निरस्तो विभीषण:॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| मैंने पुण्यात्मा विभीषण को अपने घर से निकाल दिया था; अब उसी कृत्य का दुःखद फल मुझे भोगना पड़ रहा है॥23॥ |
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| I had expelled the virtuous Vibhishana from my home; now I have to suffer the sad consequences of that very act.'॥ 23॥ |
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