श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 68: कुम्भकर्ण के वध का समाचार सुनकर रावण का विलाप  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.68.17 
राज्येन नास्ति मे कार्यं किं करिष्यामि सीतया।
कुम्भकर्णविहीनस्य जीविते नास्ति मे मति:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
अब मुझे राज्य में कोई रुचि नहीं रही। सीता को लेकर मैं क्या करूँगा? कुंभकर्ण के बिना मेरा मन नहीं लगता॥17॥
 
‘Now I have no interest in the kingdom. What will I do with Sita? I don't feel like living without Kumbhakarna.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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