श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 68: कुम्भकर्ण के वध का समाचार सुनकर रावण का विलाप  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.68.16 
ध्रुवमद्यैव संहृष्टा लब्धलक्षा: प्लवंगमा:।
आरोक्ष्यन्तीह दुर्गाणि लङ्काद्वाराणि सर्वश:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
‘निश्चय ही अब अवसर पाकर हर्ष में भरे हुए वानर आज ही लंका के समस्त दुर्गम द्वारों पर चढ़ जाएँगे ॥16॥
 
‘Surely, having got the opportunity now, the monkeys filled with joy will climb all the inaccessible gates of Lanka today itself.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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