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श्लोक 6.68.10  |
हा वीर रिपुदर्पघ्न कुम्भकर्ण महाबल।
त्वं मां विहाय वै दैवाद् यातोऽसि यमसादनम्॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| (वह रोते हुए कहने लगा-) 'हे वीर! हे महाबली कुम्भकर्ण! तुम शत्रुओं का गर्व चूर करने वाले थे; किन्तु दुर्भाग्यवश तुम मुझे असहाय छोड़कर यमलोक चले गए॥10॥ |
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| (He started crying and said-) 'Oh brave one! Oh mighty Kumbhakarna! You were going to crush the pride of the enemies; but unfortunately you left me helpless and went to Yamaloka.॥10॥ |
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