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ramayan 6.67.95: वह बड़ी जल्दी और क्रोध से एक, दो, तीन या अनेक राक्षसों और बंदरों को एक हाथ से इकट्ठा करके अपने मुंह में डाल लेता।   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  6.67.95 
एकं द्वौ त्रीन् बहून् क्रुद्धो वानरान् सह राक्षसै:।
समादायैकहस्तेन प्रचिक्षेप त्वरन् मुखे॥ ९५॥
 
 
अनुवाद
वह बड़ी जल्दी और क्रोध से एक, दो, तीन या अनेक राक्षसों और बंदरों को एक हाथ से इकट्ठा करके अपने मुंह में डाल लेता।
 
With great haste and anger he would gather one, two, three or many demons and monkeys with one hand and throw them into his mouth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)