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ramayan 6.67.94: उस समय कुम्भकर्ण भूखा था और रक्त-मांस की लालसा से व्याकुल था। उसने उस भयंकर वानर सेना में प्रवेश किया और लोभवश न केवल वानरों और भालुओं को, बल्कि राक्षसों और भूतों को भी खाना शुरू कर दिया। वह प्रमुख वानरों को उसी प्रकार खा रहा था, जैसे प्रलयकाल में मृत्यु जीवों के प्राण हर लेती है।   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  6.67.94 
बुभुक्षित: शोणितमांसगृध्नु:
प्रविश्य तद् वानरसैन्यमुग्रम्।
चखाद रक्षांसि हरीन् पिशाचा-
न्नृक्षांश्च मोहाद् युधि कुम्भकर्ण:।
यथैव मृत्युर्हरते युगान्ते
स भक्षयामास हरींश्च मुख्यान्॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
उस समय कुम्भकर्ण भूखा था और रक्त-मांस की लालसा से व्याकुल था। उसने उस भयंकर वानर सेना में प्रवेश किया और लोभवश न केवल वानरों और भालुओं को, बल्कि राक्षसों और भूतों को भी खाना शुरू कर दिया। वह प्रमुख वानरों को उसी प्रकार खा रहा था, जैसे प्रलयकाल में मृत्यु जीवों के प्राण हर लेती है।
 
At that time Kumbhakarna was hungry and was craving for blood and flesh. He entered that fearsome monkey army and started eating not only monkeys and bears but also demons and ghosts out of greed. He was devouring the chief monkeys in the same way as death takes away the lives of living beings during the time of destruction.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)