Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.67.85: इस प्रकार इस राक्षस के चंगुल में फँसकर मैं उससे पूर्ण प्रतिशोध कैसे ले सकता हूँ? मैं वही करूँगा जिससे वानरों का इच्छित और हितकारी कार्य सिद्ध हो सके॥ 85॥ | ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं गृहीतेन कथं नु नाम
शक्यं मया सम्प्रतिकर्तुमद्य।
तथा करिष्यामि यथा हरीणां
भविष्यतीष्टं च हितं च कार्यम्॥ ८५॥
अनुवाद
इस प्रकार इस राक्षस के चंगुल में फँसकर मैं उससे पूर्ण प्रतिशोध कैसे ले सकता हूँ? मैं वही करूँगा जिससे वानरों का इच्छित और हितकारी कार्य सिद्ध हो सके॥ 85॥
Having thus fallen into the clutches of this demon, how can I take full revenge from him? I shall do that which will bring about the desired and beneficial work of the monkeys.'॥ 85॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥