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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  6.67.81 
इत्येवं चिन्तयित्वाथ हनूमान् मारुतात्मज:।
भूय: संस्तम्भयामास वानराणां महाचमूम्॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
ऐसा विचार करके पवनपुत्र हनुमान् ने उस विशाल वानर सेना को पुनः आश्वस्त करके उसे दृढ़तापूर्वक स्थापित कर दिया।
 
Thinking thus, Hanuman, the son of the wind, once again reassured that huge army of monkeys and established them firmly. 81.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)