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ramayan 6.67.72-73: यह देखकर कि वानरों की सेना इधर-उधर भाग रही है और कुंभकर्ण ने पवनपुत्र बुद्धिमान वानरराज सुग्रीव को बंदी बना लिया है, हनुमान ने सोचा, 'यदि सुग्रीव इस प्रकार बंदी बना लिया गया तो मुझे क्या करना चाहिए?'   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 72-73
 
 
श्लोक  6.67.72-73 
विद्रुतां वाहिनीं दृष्ट्वा वानराणामितस्तत:।
कुम्भकर्णेन सुग्रीवं गृहीतं चापि वानरम्॥ ७२॥
हनूमांश्चिन्तयामास मतिमान् मारुतात्मज:।
एवं गृहीते सुग्रीवे किं कर्तव्यं मया भवेत्॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर कि वानरों की सेना इधर-उधर भाग रही है और कुंभकर्ण ने पवनपुत्र बुद्धिमान वानरराज सुग्रीव को बंदी बना लिया है, हनुमान ने सोचा, 'यदि सुग्रीव इस प्रकार बंदी बना लिया गया तो मुझे क्या करना चाहिए?'
 
Seeing that the army of monkeys is running here and there and Kumbhakarna has captured the monkey king Sugreev, the wise son of the wind, Hanuman thought, 'What should I do if Sugreev is captured like this?'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)