Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.67.65: लेकिन राक्षस डर के मारे काँप उठा। उसके चेहरे पर उदासी छा गई और जंगल में घूम रहे वानर बहुत खुश होकर दहाड़ने लगे। भाला टूटा देखकर सभी ने पवनपुत्र हनुमान की स्तुति की। | ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बभूवाथ परित्रस्तो राक्षसो विमुखोऽभवत्।
सिंहनादं च ते चक्रु: प्रहृष्टा वनगोचरा:।
मारुतिं पूजयांचक्रुर्दृष्ट्वा शूलं तथागतम्॥ ६५॥
अनुवाद
लेकिन राक्षस डर के मारे काँप उठा। उसके चेहरे पर उदासी छा गई और जंगल में घूम रहे वानर बहुत खुश होकर दहाड़ने लगे। भाला टूटा देखकर सभी ने पवनपुत्र हनुमान की स्तुति की।
But the demon trembled in fear. Sadness spread on his face and the monkeys roaming in the forest became very happy and started roaring. Seeing the spear broken, all of them praised Hanuman, the son of the wind.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥