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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  6.67.62 
तत् कुम्भकर्णस्य भुजप्रणुन्नं
शूलं शितं काञ्चनधामयष्टिम्।
क्षिप्रं समुत्पत्य निगृह्य दोर्भ्यां
बभञ्ज वेगेन सुतोऽनिलस्य॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
वायुपुत्र हनुमान ने शीघ्रता से उछलकर दोनों हाथों से उस तीक्ष्ण भाले को पकड़ लिया, जिस पर सोने के छल्ले लगे थे और जो कुंभकर्ण के हाथ से गिर गया था, और उसे बड़े जोर से तोड़ दिया।
 
Hanuman, the son of Vayu, quickly jumped up and caught with both hands that sharp spear which had gold rings on it that had fallen from Kumbhakarna's hand and broke it with great force.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)