Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.67.61: उस पर्वत शिखर से चोट लगने पर कुंभकर्ण अत्यंत क्रोधित हुआ। क्रोध से मुँह खोलकर वह जोर-जोर से दहाड़ने लगा। फिर उसने बिजली के समान चमकने वाला अपना भाला सुग्रीव को मारने के लिए चलाया। 61. | ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स शैलशृङ्गाभिहतश्चुकोप
ननाद रोषाच्च विवृत्य वक्त्रम्।
व्याविध्य शूलं स तडित्प्रकाशं
चिक्षेप हर्यृक्षपतेर्वधाय॥ ६१॥
अनुवाद
उस पर्वत शिखर से चोट लगने पर कुंभकर्ण अत्यंत क्रोधित हुआ। क्रोध से मुँह खोलकर वह जोर-जोर से दहाड़ने लगा। फिर उसने बिजली के समान चमकने वाला अपना भाला सुग्रीव को मारने के लिए चलाया। 61.
Kumbhakarna was very angry after being hit by that mountain peak. He started roaring loudly with his mouth wide open in anger. Then he swung that spear which was shining like lightning and used it to kill Sugreeva. 61.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥