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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 44-45
 
 
श्लोक  6.67.44-45 
स तेनाभिहतो मूर्ध्नि शैलेनेन्द्ररिपुस्तदा॥ ४४॥
कुम्भकर्ण: प्रजज्वाल क्रोधेन महता तदा।
सोऽभ्यधावत वेगेन वालिपुत्रममर्षण:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
पर्वत शिखर से सिर पर प्रहार पाकर इन्द्र का शत्रु कुम्भकर्ण अत्यन्त क्रोधित हो गया और प्रहार सहन न कर पाने के कारण वह बालि के पुत्र की ओर बहुत तेजी से दौड़ा।
 
Having received a blow on his head from the mountain peak, Kumbhakarna, the enemy of Indra, became very angry and being unable to bear the blow, he ran very fast towards Vali's son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)