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ramayan 6.67.40: जिनकी सम्पूर्ण जवानी नष्ट हो गई थी, वे वानर कुम्भकर्ण के प्रहार से भयभीत होकर विकृत स्वर में चीखने लगे ॥40॥   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  6.67.40 
ततस्ते वध्यमानास्तु हतयूथा: प्लवंगमा:।
वानरा भयसंविग्ना विनेदुर्विकृतै: स्वरै:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
जिनकी सम्पूर्ण जवानी नष्ट हो गई थी, वे वानर कुम्भकर्ण के प्रहार से भयभीत होकर विकृत स्वर में चीखने लगे ॥40॥
 
Those monkeys, whose entire youth had been destroyed, were terrified after being struck by Kumbhakarna and began to shriek in distorted voices. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)