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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.67.26 
स्पर्शानिव प्रहारांस्तान् वेदयानो न विव्यथे।
ऋषभं तु महावेगं बाहुभ्यां परिषस्वजे॥ २६॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि वे लोग उस पर बड़े जोर से प्रहार कर रहे थे, फिर भी उसे ऐसा लग रहा था जैसे कोई उसे धीरे से छू रहा हो। इसलिए उन्हें कोई पीड़ा नहीं हुई। उसने महाशक्तिशाली ऋषभ को अपनी दोनों भुजाओं में भर लिया।
 
Although these people attacked him with great force, still it felt as if someone was touching him gently. Therefore, they did not cause him any pain. He embraced the very powerful Rishabh in both his arms.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)