Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.67.177: जो बड़े-बड़े युद्धों में कभी पराजित नहीं होता था और जो देवताओं की सेनाओं को भी कुचल सकता था, उस महादैत्य कुम्भकर्ण को रणभूमि में मारकर रघुनाथजी को वैसा ही आनन्द हुआ जैसा वृत्रासुर को मारकर देवराज इन्द्र को हुआ था॥177॥ | ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो बड़े-बड़े युद्धों में कभी पराजित नहीं होता था और जो देवताओं की सेनाओं को भी कुचल सकता था, उस महादैत्य कुम्भकर्ण को रणभूमि में मारकर रघुनाथजी को वैसा ही आनन्द हुआ जैसा वृत्रासुर को मारकर देवराज इन्द्र को हुआ था॥177॥
After killing the great demon Kumbhakarana, who was never defeated in the biggest wars and who could crush even the armies of the gods, on the battlefield, Raghunathji felt as happy as Devaraj Indra felt after killing Vritraasura.॥ 177॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे सप्तषष्टितम: सर्ग: ॥ ६ ७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें सरसठवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ६ ७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥