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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 171
 
 
श्लोक  6.67.171 
तच्चातिकायं हिमवत् प्रकाशं
रक्षस्तदा तोयनिधौ पपात।
ग्राहान् परान् मीनवरान् भुजंगमान्
ममर्द भूमिं च तथा विवेश॥ १७१॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार उस राक्षस का विशाल धड़, जो हिमालय के समान दिखाई देता था, तुरन्त ही समुद्र के जल में गिर पड़ा और बड़े-बड़े मगरमच्छों, मछलियों और साँपों को कुचलता हुआ पृथ्वी में समा गया।।171।।
 
Similarly, the huge torso of that demon, which looked like the Himalayas, instantly fell into the water of the ocean and, crushing large crocodiles, fishes and snakes, entered the earth. 171.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)