Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.67.167: श्री रघुनाथजी की भुजाओं से प्रेरित होकर वह बाण इन्द्र के वज्र के समान बड़े वेग से चला और अपनी प्रभा से दसों दिशाओं को प्रकाशित करने लगा। वह धूमरहित अग्नि के समान भयंकर प्रतीत हो रहा था॥167॥ | ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स सायको राघवबाहुचोदितो
दिश:स्वभासा दश सम्प्रकाशयन्।
विधूमवैश्वानरभीमदर्शनो
जगाम शक्राशनिभीमविक्रम:॥ १६७॥
अनुवाद
श्री रघुनाथजी की भुजाओं से प्रेरित होकर वह बाण इन्द्र के वज्र के समान बड़े वेग से चला और अपनी प्रभा से दसों दिशाओं को प्रकाशित करने लगा। वह धूमरहित अग्नि के समान भयंकर प्रतीत हो रहा था॥167॥
Inspired by the arms of Shri Raghunath, that arrow moved with great speed like Indra's thunderbolt, illuminating all the ten directions with its brilliance. It appeared as terrifying as a smokeless fire.॥ 167॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥