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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 155
 
 
श्लोक  6.67.155 
वायव्यमादाय ततोऽपरास्त्रं
राम: प्रचिक्षेप निशाचराय।
समुद‍्गरं तेन जहार बाहुं
स कृत्तबाहुस्तुमुलं ननाद॥ १५५॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर भगवान् राम ने वायव्य नामक दूसरा अस्त्र कुम्भकर्ण पर चलाया और उससे उस राक्षस की दाहिनी भुजा गदासहित काट डाली। भुजा कट जाने पर वह राक्षस भयंकर स्वर में चिल्लाने लगा॥155॥
 
Seeing this, Lord Rama aimed another weapon called Vayavya and shot it at Kumbhakarna and with it he cut off the right arm of that demon along with his club. When the arm was cut off, the demon started screaming in a terrifying voice.॥155॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)