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ramayan 6.67.150: 'भोले रघुनन्दन! तुम इक्ष्वाकुवंशी वीर हो, अतः मेरे शरीर के अंगों पर अपना पराक्रम प्रकट करो। मैं तुम्हारा पौरुष और बल-विक्रम देखकर ही तुम्हें खाऊँगा। 150॥   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 150
 
 
श्लोक  6.67.150 
दर्शयेक्ष्वाकुशार्दूल वीर्यं गात्रेषु मेऽनघ।
ततस्त्वां भक्षयिष्यामि दृष्टपौरुषविक्रमम्॥ १५०॥
 
 
अनुवाद
'भोले रघुनन्दन! तुम इक्ष्वाकुवंशी वीर हो, अतः मेरे शरीर के अंगों पर अपना पराक्रम प्रकट करो। मैं तुम्हारा पौरुष और बल-विक्रम देखकर ही तुम्हें खाऊँगा। 150॥
 
‘Innocent Raghunandan! You are a brave man of Ikshvaku dynasty, hence show your might on my body parts. I will eat you only after seeing your virility and strength-vikram. 150॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)