Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.67.146-147: महाबली कुम्भकर्ण मानो समस्त वानरों के हृदय फाड़कर बड़े जोर से विकृत स्वर में हँसा और मेघ की गर्जना के समान गम्भीर एवं भयानक वाणी में श्री रघुनाथजी से बोला - 'राम! मुझे विराध, कबन्ध और खर न समझना। मैं मारीच या वालि भी नहीं हूँ। यह कुम्भकर्ण आपसे युद्ध करने आया है॥ 146-147॥ | ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दारयन्निव सर्वेषां हृदयानि वनौकसाम्।
प्रहस्य विकृतं भीमं स मेघस्तनितोपमम्॥ १४६॥
कुम्भकर्णो महातेजा राघवं वाक्यमब्रवीत्।
नाहं विराधो विज्ञेयो न कबन्ध: खरो न च।
न वाली न च मारीच: कुम्भकर्ण: समागत:॥ १४७॥
अनुवाद
महाबली कुम्भकर्ण मानो समस्त वानरों के हृदय फाड़कर बड़े जोर से विकृत स्वर में हँसा और मेघ की गर्जना के समान गम्भीर एवं भयानक वाणी में श्री रघुनाथजी से बोला - 'राम! मुझे विराध, कबन्ध और खर न समझना। मैं मारीच या वालि भी नहीं हूँ। यह कुम्भकर्ण आपसे युद्ध करने आया है॥ 146-147॥
The mighty Kumbhakarna, as if tearing the hearts of all the monkeys apart, laughed loudly in a distorted voice and in a grave and terrifying voice, like the roar of a cloud, spoke to Shri Raghunathji - 'Rama! I should not be mistaken for Viradha, Kabandha and Khar. I am not even Marich or Vaali. This Kumbhakarna has come to fight with you.॥ 146-147॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥