Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.67.125-126: जब भरत के बड़े भाई धर्मात्मा श्री राम ने अपने सुवर्णमय बाणों से उस महान पर्वत शिखर को काट डाला, तब उसकी ज्योति से प्रकाशित हो रहे मेरु पर्वत के सींग के समान शिखर ने भूमि पर गिरते हुए दो सौ वानरों को कुचल डाला ॥125-126॥   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 125-126
 
 
श्लोक  6.67.125-126 
ततस्तु रामो धर्मात्मा तस्य शृङ्गं महत् तदा।
शरै: काञ्चनचित्राङ्गैश्चिच्छेद भरताग्रज:॥ १२५॥
तन्मेरुशिखराकारं द्योतमानमिव श्रिया।
द्वे शते वानराणां च पतमानमपातयत्॥ १२६॥
 
 
अनुवाद
जब भरत के बड़े भाई धर्मात्मा श्री राम ने अपने सुवर्णमय बाणों से उस महान पर्वत शिखर को काट डाला, तब उसकी ज्योति से प्रकाशित हो रहे मेरु पर्वत के सींग के समान शिखर ने भूमि पर गिरते हुए दो सौ वानरों को कुचल डाला ॥125-126॥
 
When Bharata's elder brother Dharmatma Shri Ram cut that great mountain peak with his golden arrows, the horn-like peak of Mount Meru, shining with its light, crushed two hundred monkeys falling on the ground. 125-126॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)