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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  6.67.121 
स बाणैरतिविद्धाङ्ग: क्षतजेन समुक्षित:।
रुधिरं परिसुस्राव गिरि: प्रस्रवणं यथा॥ १२१॥
 
 
अनुवाद
बाणों से उसके सभी अंग बुरी तरह घायल हो गए, जिससे वह रक्त से नहा गया और जैसे पर्वतीय झरने बहते हैं, उसी प्रकार उसके शरीर से रक्त की धारा बहने लगी।
 
All his limbs were badly injured by the arrows, so he was bathed in blood and just like a mountain springs flow, in the same way he started gushing out blood from his body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)