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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 117
 
 
श्लोक  6.67.117 
तस्य रामेण विद्धस्य सहसाभिप्रधावत:।
अङ्गारमिश्रा: क्रुद्धस्य मुखान्निश्चेरुरर्चिष:॥ ११७॥
 
 
अनुवाद
श्री राम के बाणों से घायल होकर उसने अचानक उन पर आक्रमण कर दिया। उस समय कुम्भकर्ण क्रोध से भर गया और उसके मुख से अंगारों से मिश्रित अग्नि की लपटें निकल रही थीं। 117.
 
Wounded by the arrows of Shri Ram, he suddenly attacked him. At that time, Kumbhakarna was filled with anger and flames of fire mixed with embers were coming out of his mouth. 117.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)