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ramayan 6.67.110: तुमने युद्धस्थल में अपने पराक्रम, बल और साहस से मुझे संतुष्ट किया है; अतः अब मैं केवल राम को मारना चाहता हूँ, जिनकी मृत्यु से समस्त शत्रु सेना स्वतः ही नष्ट हो जाएगी॥110॥   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 110
 
 
श्लोक  6.67.110 
यत् तु वीर्यबलोत्साहैस्तोषितोऽहं रणे त्वया।
राममेवैकमिच्छामि हन्तुं यस्मिन् हते हतम्॥ ११०॥
 
 
अनुवाद
तुमने युद्धस्थल में अपने पराक्रम, बल और साहस से मुझे संतुष्ट किया है; अतः अब मैं केवल राम को मारना चाहता हूँ, जिनकी मृत्यु से समस्त शत्रु सेना स्वतः ही नष्ट हो जाएगी॥110॥
 
You have satisfied me with your valour, strength and courage on the battlefield; so now I wish to kill only Rama, whose death will automatically kill the entire enemy army.॥ 110॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)