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ramayan 6.67.105: तब उस भयानक राक्षस ने मेघों की गड़गड़ाहट के समान गम्भीर वाणी में सुमित्रानन्दन लक्ष्मण का अपमान करते हुए कहा- 105॥   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  6.67.105 
तत: स राक्षसो भीम: सुमित्रानन्दवर्धनम्।
सावज्ञमेव प्रोवाच वाक्यं मेघौघनि:स्वन:॥ १०५॥
 
 
अनुवाद
तब उस भयानक राक्षस ने मेघों की गड़गड़ाहट के समान गम्भीर वाणी में सुमित्रानन्दन लक्ष्मण का अपमान करते हुए कहा- 105॥
 
Then that terrible demon said in a voice as serious as the thunder of clouds, insulting Sumitranandan Lakshmana - 105॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)