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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  6.67.102 
पीडॺमानस्तदस्त्रं तु विशेषं तत् स राक्षस:।
ततश्चुकोप बलवान् सुमित्रानन्दवर्धन:॥ १०२॥
 
 
अनुवाद
उनसे पीड़ित होकर राक्षस ने लक्ष्मण के अस्त्र को नष्ट कर दिया। तब सुमित्रा का आनन्द बढ़ाने वाले पराक्रमी लक्ष्मण अत्यन्त क्रोधित हो उठे।
 
The demon, afflicted by them, destroyed Lakshman's weapon. Then the powerful Lakshman, who increased the joy of Sumitra, became very angry. 102.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)