श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 66: कुम्भकर्ण के भय से भागे हुए वानरों का अङ्गद द्वारा प्रोत्साहन और आवाहन, कुम्भकर्ण द्वारा वानरों का संहार  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.66.28 
एवं ब्रुवाणं तं शूरमङ्गदं कनकाङ्गदम्।
द्रवमाणास्ततो वाक्यमूचु: शूरविगर्हितम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जब स्वर्ण-कवचधारी वीर अंगद ऐसा कह रहे थे, तब भागते हुए वानरों ने उन्हें ऐसा उत्तर दिया, जिसकी वीर योद्धा सदैव निन्दा करते हैं। 28.
 
While the valiant Angada, who wore the golden armlet, was saying this, the fleeing monkeys gave him an answer which is always condemned by valiant warriors. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)