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श्लोक 6.65.32  |
भ्रातरं सम्परिष्वज्य कृत्वा चापि प्रदक्षिणम्।
प्रणम्य शिरसा तस्मै प्रतस्थे स महाबल:॥ ३२॥ |
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| अनुवाद |
| उस महाबली योद्धा ने अपने भाई को हृदय से लगाकर उसकी परिक्रमा की और उसे सिर नवाया और फिर युद्ध के लिए चला गया ॥32॥ |
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| Holding his brother close to his heart, that mighty warrior circumambulated him and bowed his head to him. After that he went for war. 32॥ |
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