श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 65: कुम्भकर्ण की रणयात्रा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.65.3 
गर्जन्ति न वृथा शूरा निर्जला इव तोयदा:।
पश्य सम्पद्यमानं तु गर्जितं युधि कर्मणा॥ ३॥
 
 
अनुवाद
‘वीर पुरुष जलहीन मेघ के समान व्यर्थ गर्जना नहीं करता। अब तुम देखो, मैं अपने पराक्रम से ही रणभूमि में गर्जना करूँगा।॥3॥
 
‘A brave man does not roar uselessly like a waterless cloud. Now you see, I will roar on the battlefield only by my valour.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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