श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 65: कुम्भकर्ण की रणयात्रा  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  6.65.29 
श्रोणीसूत्रेण महता मेचकेन व्यराजत।
अमृतोत्पादने नद्धो भुजङ्गेनेव मन्दर:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
उनकी कमर के चारों ओर एक बड़ी काली करधनी थी, जिसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे समुद्र मंथन के दौरान अमृत निकालने के लिए नागों के राजा वासुकी के चारों ओर मंदार पर्वत लिपटा हुआ हो।
 
Around his waist was a large black girdle, which made him look like Mount Mandara wrapped around King of Serpents Vasuki during the churning of the ocean to produce nectar.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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