श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 65: कुम्भकर्ण की रणयात्रा  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.65.27 
दिव्यानि च सुगन्धीनि माल्यदामानि रावण:।
गात्रेषु सज्जयामास श्रोत्रयोश्चास्य कुण्डले॥ २७॥
 
 
अनुवाद
इतना ही नहीं, रावण ने उसके शरीर के विभिन्न अंगों पर दिव्य सुगन्धित पुष्पों की मालाएँ भी बाँध दीं और उसके दोनों कानों में कुण्डल भी पहना दिए॥ 27॥
 
Not only that, Ravana also tied garlands of divinely fragrant flowers on various parts of her body and put earrings in both her ears.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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