श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 65: कुम्भकर्ण की रणयात्रा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.65.2 
सोऽहं तव भयं घोरं वधात् तस्य दुरात्मन:।
रामस्याद्य प्रमार्जामि निर्वैरो हि सुखी भव॥ २॥
 
 
अनुवाद
'राजन्! आज मैं उस दुष्टात्मा राम को मारकर तुम्हारा महान भय दूर कर दूँगा। तुम शत्रुता से मुक्त होकर सुखी हो जाओगे।॥ 2॥
 
‘King! Today I will kill that evil souled Ram and remove your great fear. You will be free from the feeling of enmity and become happy.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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