श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 64: महोदर का कुम्भकर्ण के प्रति आक्षेप करके रावण को बिना युद्ध के ही अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति का उपाय बताना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.64.21 
दृष्ट: कश्चिदुपायो मे सीतोपस्थानकारक:।
रुचितश्चेत् स्वया बुद्धॺा राक्षसेन्द्र तत: शृणु॥ २१॥
 
 
अनुवाद
राक्षसराज! मैंने एक उपाय सोचा है जिससे सीता सदैव आपकी सेवा में तत्पर रहेंगी। कृपया उसे सुनें। सुनने के बाद मन ही मन उस पर विचार करें और यदि वह उचित लगे तो उसका प्रयोग करें।
 
‘King of demons! I have thought of a solution which will ensure that Sita is always available for your service. Please listen to it. After listening, think over it with your mind and if it seems right, then use it.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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