श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 64: महोदर का कुम्भकर्ण के प्रति आक्षेप करके रावण को बिना युद्ध के ही अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति का उपाय बताना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.64.20 
लब्ध्वा पुरस्ताद् वैदेहीं किमर्थं त्वं विलम्बसे।
यदीच्छसि तदा सीता वशगा ते भविष्यति॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'महाराज! विदेह की राजकुमारी को अपने सामने पाकर भी आप विलम्ब क्यों कर रहे हैं? जब आप चाहेंगे, सीता आपके अधीन हो जाएँगी।'
 
‘Maharaj! Why are you delaying even after finding the princess of Videha in front of you? Sita will be under your control whenever you wish.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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